Raja Rani ki kahani – किसके भाग्य का खाती हो

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एक समय की बात है एक बहुत बड़ा राज्य था,बहा के राजा की दस पुत्रियां थी|
सभी राजकुमारियां बहुत खूबसूरत थी|

राज्य की तरक्की देख राजा के मन में अहंकार गया,एक दिन उसने अपनी सभी पुत्रियों को बुलाया और पूछा
बताओं आप सव किसके भाग्य का खाती है|

ऊतर में सभी ने अपने पिता को कहा की हम आपके भाग्य का खाते है राजा अत्यंत खुश हुआ|

अन्ततः दसवी राजकुमारी बची राजा ने उनसे पूछा पुत्री आप बताये आप किसके भाग्य का खाती है
दसवी राजकुमारी ने उत्तर दिया की पिताजी हम अपने भाग्य का खाते है |

राजा हैरान हुए उन्होंने फिर पूछा की आप किसके भाग्य का खाती है राजकुमारी ने फिर बही उत्तर दिया इस बार राजा को क्रोध आ गया
राजा ने राजकुमारी से पूछा बो कैसे?

राजकुमारी ने उत्तर दिया पिताजी “हर एक व्यक्ति अपना भाग्य लिखवा कर आया है उसे प्राप्त होने बाली हर एक बस्तु उसके भाग्य से मिलती है”|

राजा को बहुत क्रोध आया राजा बोले ठीक है पुत्री देखते तुम्हारे भाग्य में क्या है,राजा ने अगले ही दिन अपनी सभी पुत्रियों का विवाह निश्चित कर दिया
उन्होंने अपनी सभी नो पुत्रियों का विवाह बहुत बड़े घर में किया लेकिन दशवी पुत्री का विवाह उन्होंने अत्यन गरीव अथवा अपाहिज ब्यक्ति से करवा दिया|
और मुस्कुराकर बोले ये है तुम्हारे भाग्य में|

राजकुमारी ने खुसी खुसी उस विवाह को स्वीकार कर लिया
वह अपने अपाहिज पति के साथ खुसी खुसी एक पेड़ के निचे रहने लगी क्यूंकि उनके पास घर नहीं था|
कई महीने बीत गए राजकुमारी अपने पति की बहुत सेवा करती थी बो खुश थी|

एक दिन बो पेड़ के पास खाना बना रही थी तभी बहा एक तोता और मैना आकर उस पेड़ पे बैठ गए और बाते करने लगे उसी राजकुमारी के बारे में बात करने लगे उन्हें दुःख होता था उस राजकुमारी को देख कर तभी मैना बोलती बिचारी राजकुमारी कितनी कष्दायी जीवन ब्यतीत कर रही है|

तोता बोला हां तुम सही बोलती हो काश में राजकुमारी को उस खजाने के बारे में बता सकता जो मंदिर के पास रखा है इतना बोलके तोता मैन बहा से चाले जाते है|

राजकुमारी उन दोनों की बात सुन लेती है और वह उसी मंदिर के पास जाती है तो बहा उसे सोना मिल जाता है जिससे वह अपने पति का इलाज करवाती है|
और अपने परिवार के लिए वह बहुत आलीशान महल बन बाती है

राजकुमारी के पिता को इस बात की खवर मिलती है तो वह बहा आते है और हैरान हो जाते है
राजकुमारी उनका बहुत अच्छे से स्वागत करती है राजा को दुःख होता है अपने अहंकार पर और बो अपनी पुत्री से छमा मांगते है और बताते है तुम्हारी बहनो जिनका विवाह अपने राजकुमारों से करवाया था आज बे अत्यंत दुखी है दूसरे राज्यो ने आक्रमड़ कर उनसे उनके राज्ये छींन लिए

तुमने सही कहा था<हर ब्यक्ति अपने भाग्य का खाता है|