poem – किसान आंदोलन

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खुद भूखा रहकर जो औरों को भोजन देता है।
खुद को कष्ट में डाल दूसरों को जीवन देता है !!

सड़कों पर दूध बहाने वाले 
ये किसान नहीं हो सकते !!

हिंसा को भड़काने वाले 
ये किसान नहीं हो सकते !!

राजनीति की चौपालों पर लाशें है।
इक्का बेगम और गुलाम की तांशें हैं !!

लाशों के सौदागर दिखते 
ये किसान नहीं हो सकते !!

हिंसा को भड़काने वाले 
ये किसान नहीं हो सकते।

खेतों में जो श्रम का पानी देता है।
फसलों को जो खून की सानी देता है !!

फसलों को आग लगाने वाले 
ये किसान नहीं हो सकते !!