Poem – घर से निकले बुद्धूराम |

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गर्मी आई लाने आम ,
घर से निकले बुद्धूराम |

नहीं लिया हांथों में छाता ,
गर्म हो गया उनका माथा |

दौड़े दौड़े घर को आए ,
पानी डाला खूब नहाये |

फिर बोले हे भगवान ,
कैसे लाऊँ मैं आम ||