Poem – फूलों के गीत

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हमने फूलों से सीखा खिलना हँसना और हँसाना,
अपनी मधुर महक से सारे उपवन को महकाना !!

मन्द पवन में झूम-झूमकर डाली पर इतराना,
भौरों के मन के प्याले को मधु रस से भर जाना !!

तितली अपने चंचल परों की रंगत हम से पाती,
इधर-उधर उड़ अपनी छवि से सबका चित्त लुभाती !!

काँटों की गोदी में पल कर हम हँसते रहते हैं,
सूरज की गर्मी में जलकर हम हँसते रहते हैं !!

अन्त समय धरती पर गिरकर हम हँसते रहते हैं,
हम जीवन भर समझ न पाते दुख किसको कहते हैं !!

-निरंकार देव