poem – आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे

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आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे ?
बन्दर की झोपडी में सो रहे थे,

बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,

पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे….