Akbar-birbal ki kahani – फारस के छह राजा

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फारस के राजा ने अकबर की चतुराई तथा हाज़िर- जबाबी के बहुत से किस्से सुन रखे थे ,
वह जानना चाहता था की क्या बीरबल बास्तव में चतुर हैं |

वह उनसे मिलने को वेताव था , अथा राजा ने अपने सन्देश बाहक के हाथों ,
बीरबल को एक सन्देश भिजवाया की वे पारस में पधारने का कष्ट करे |

बीरबल फारस देश पहुचे , जव बे दरवार में गए तो उन्होंने देखा की ,
छह सिंघासनो पर छह राजा बैठें है , और सभी राजा दिखने में एक से है |

यह देखकर बीरबल हैरान रह गए , बे समझ गए की राजा ने उनकी परीक्षा लेने के लिए ऐसा किया है ,
उन्होंने तत्काल असली राजा के सामने सिर झुका दिया |

राजा अस्श्चार्य से बोला , ” प्रिये बीरबल! तुम्हे कैसे पता चला की मैं ही फारस का असली राजा हूँ ?”
बीरबल ने उत्तर दिया , महाराज आपके पाचों हम्सकल आपकी और देख रहे थे |

जैसे आपके निर्देशों का इन्तेजार कर रहे हो , केवल आप ही आगे देख रहे थे ,
जैसे कोई नेता देखता है , एक राजा ही आत्मविश्वास के साथ आगे देखता है |

जवकि राजा की प्रजा उसके निर्देश पाने के लिए उसका मुख देखा करती है ,
फारस के राजा ने भी मान लिया की चतुराई और हाजिर- जवावी में बीरबल का कोई मुकावला नहीं ||