Essay – वर्षा जल संचयन ( Rain Water Harvesting )

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वर्षा जल संचयन अर्थात् प्राकृतिक जलाशय या मानव निर्मित टैंकों में बारिश के पानी को एकत्रित करना है।
ये भविष्य में विभिन्न उद्देश्यों के लिये वर्षा जल को इकट्ठा और संग्रहित करने की तकनीक है।

बारिश के पानी को इकट्ठा करने का सबसे साधारण और आसान तरीका छतों के पानी को एकत्रित करना है।
इस तकनीक का इस्तेमाल करके हम बरसात के मौसम में बड़े स्तर पर स्वच्छ बारिश के पानी को इकट्ठा कर सकते हैं।

इसे लंबे समय तक के लिये घर के कामों के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे पौधों को पानी देना, पशुओं के लिये और खेती आदि के लिये। बारिश के पानी को इकट्ठा करने के निम्न लाभ ये हैं |

:- नगरपालिका के जल आपूर्ति भार और बिजली बिल को घटाने में, मुफ्त जल आपूर्ति को सुधारने में,
ग्रामीण क्षेत्रों में फसल उत्पादन में ये मदद करता है, जो खाद्य सुरक्षा की ओर ले जाता है।

:- ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू या व्यक्तिगत असुरक्षा को घटाने में वर्षा जल संचयन व्यवस्था मदद करती है।

:- ये कम पानी वाले क्षेत्रों में आसान और कम कीमत की जल आपूर्ति उपलब्ध कराता है,
जो खाद्य सुरक्षा और आय उत्पन्न करने में मदद करता है।

:- ये मानसून के दौरान सतह के जल को बहने से बचाता है और अधिक जल को संरक्षित करने के लिये है।

:- ये मिट्टी के कटाव में कमी लाने में मदद करता है।

:- वनों की कटाई, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, नीचे की मिट्टी से बारिश का पानी रिसना आदि के कारण लगातार भूमि जलस्तर घट रहा है।

ये आकलन किया गया है कि जलस्तर में 1 मीटर की बढ़ौतरी लगभग 0.4KWH बिजली को बचायेगा।

तमिलनाडु भारत का एकमात्र राज्य है और अब पहला भारतीय राज्य होगा जहाँ बारिश के पानी को इकट्ठा करना जरुरी होगा।
तमिलनाडु राज्य सरकार ने 30 मई 2014 को ये घोषणा कि है कि चेन्नई में विभिन्न स्थानों पर बारिश के जल को इकट्ठा करने के लिये ,
लगभग 50,000 ढांचों की स्थापना करनी है।

अब तक, तमिलनाडु में लगभग 4000 मंदिरों में वर्षा जल संग्रहण के लिये टैंक हैं जो जमीन के पानी को पुनर्भरण में भी मदद कर रहें हैं।

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