Daadi ki kahani – लोमड़ी और उसके खट्टे अंगूर

0
9244
views

एक जंगल था बहा एक लोमड़ी रहती थी, जो अंगूर खाने की बहुत शौकीन थी। एक बार वह अंगूरों के बाग से गुजर रही थी।
चारों ओर स्वादिष्ट अंगूरों के गुच्छे लटक रहे थे। मगर वे सभी लोमड़ी की पहुंच से बाहर थे।

अंगूरों को देखकर लोमड़ी के मुह में पानी आजाता । वह सोचने लगी- ‘वाह! कितने सुन्दर और मीठे अंगूर हैं।

काश मैं इन्हें खा सकती।’ यह सोचकर लोमड़ी अपने मन को मना के उछल-उछल कर अंगूरों के गुच्छों तक पहुंचने की कोशिश करने लगी। परंतु वह हर बार नाकाम रह जाती। बस, अंगूर के गुच्छे उसकी उछाल से कुछ ही दूरी पे रह जाते थे |

अंत में बेचारी लोमड़ी उछल-उछल कर थक गई और अपने घर की ओर चल दी।
जाते-जाते उसने सोचा- ‘ये अंगूर खट्टे हैं। इन्हें पाने के लिए अपना समय नष्ट करना ठीक नहीं।’

इस तरह बह अपने मन को मनाके बहा से चली जाती, और कमी अंगूरों में निकाल देती |

इस कहानी से यह सार निकलता है की, “यदि कोई ब्यक्ति किसी चीज़ को नहीं पा पाता, तो बह उससे तुच्छ दुष्टि से देखने लगता है”|

SHARE

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here