Akbar birbal stories – बीरबल ने बचाई जान

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अकबर एक दयालु और स्नेही राजा थे , लेकिन उन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आता था |
एक दिन अकबर को एक दरवारी पे बहुत गुस्सा आया |

उन्होंने पहरेदार को हुकुम दे दिया की अगले दिन उसका सिर काट दिया जाए |

यह सुनकर दरवारी रोता हुआ बीरबल के पास जा पंहुचा और अपनी जान बचाने के लिए ,
भीक मांगने लगा !

मेहरवानी करके मुझे महाराज के गुस्से से बचाओं , तव बीरबल ने उसे एक सलाह दी |
अगले दिन दरवारी महल के दरवाजे के पास खड़ा था |

तभी एक पहरेदार ने उसे देख लिया , पहरेदार दरवारी को मरने के लिए ले जाने लगा ,
तो वह बोला – मैं मरने से पहले एक बार महाराज से मिलना चाहता हूँ |

पहरेदार ने बेमन से उसकी बात मान ली , दरवारी को देखकर अकबर ने पहरेदार से कहा ,
“मैंने कहा था की इसकी गर्दन काट दो , फिर तुम इसे यहाँ क्यों ले आए ?”

तब दरबारी अकबर के आगे घुटने टेक कर बैठ गया और बोला ,
“महाराज आप मेरा सिर कहते थे , इसीलिए मैं स्वयं उसे लेकर हाज़िर हो गया हूँ |

मैंने सोचा पता नहीं मेरे मरने के बाद ये लोग आपको मेरा सर लाकर दे या नहीं ?”
अकबर मुस्कुराकर बोले ,” बहुत अच्छी बात है अब तुम इसे अपने पास रख सकते हो |”

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